Saturday, 11 May 2019

इक इल्ज़ाम पर ख़ुश हो रहा हूँ

तवज्जो के लिए तरसा हूँ इतना
कि इक इल्ज़ाम पर ख़ुश हो रहा हूँ
- Shariq Kaifi


दिन बनाने में रात लगती है।

दिन बनाने में रात लगती है।
तुमको आसान बात लगती है।।
Din banaane me raat lagti hai..
Tumko asaan baat lagti hai..
Madhyam Saxena


दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए

दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए
जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए
निदा फ़ाज़ली


जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया

जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया
बच्चों के स्कूल में शायद तुम से मिली नहीं है दुनिया
निदा फ़ाज़ली

डॉ. कामरान ख़ान 'मुन्तज़िर'

जो मौसम तेरे साथ थे ख़ूबसूरत
वही अब तेरे बिन सताने लगे हैं
तेरी याद की खिल रही टहनियों पर
अभी तक वो लम्हे पुराने लगे हैं
डॉ. कामरान ख़ान 'मुन्तज़िर'


दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़