Saturday, 11 May 2019

दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए

दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए
जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए
निदा फ़ाज़ली


No comments:

Post a Comment

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़