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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया बच्चों के स्कूल में शायद तुम से मिली नहीं है दुनिया निदा फ़ाज़ली
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अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए उबैदुल्लाह अलीम
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मुझे तलाश थी जिसकी वह मेरे अंदर था मगर मैं ढूंढ रहा था उसे जमाने में (फहीम क़रार)

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