Saturday, 11 May 2019

इक इल्ज़ाम पर ख़ुश हो रहा हूँ

तवज्जो के लिए तरसा हूँ इतना
कि इक इल्ज़ाम पर ख़ुश हो रहा हूँ
- Shariq Kaifi


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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़