Saturday, 11 May 2019

डॉ. कामरान ख़ान 'मुन्तज़िर'

जो मौसम तेरे साथ थे ख़ूबसूरत
वही अब तेरे बिन सताने लगे हैं
तेरी याद की खिल रही टहनियों पर
अभी तक वो लम्हे पुराने लगे हैं
डॉ. कामरान ख़ान 'मुन्तज़िर'


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