Friday, 5 July 2019

तलाश

मुझे तलाश थी जिसकी वह मेरे अंदर था मगर मैं ढूंढ रहा था उसे जमाने में

(फहीम क़रार)

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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़