love, peace, harmony and humanity
Saturday, 20 July 2019
तू मिरे साथ चल न पाएगा
तुझ को दुनिया के साथ चलना है
तू मिरे साथ चल न पाएगा
अंजुम रहबर
अंजुम रहबर
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया
जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया बच्चों के स्कूल में शायद तुम से मिली नहीं है दुनिया निदा फ़ाज़ली
उबैदुल्लाह अलीम
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए उबैदुल्लाह अलीम
तलाश
मुझे तलाश थी जिसकी वह मेरे अंदर था मगर मैं ढूंढ रहा था उसे जमाने में (फहीम क़रार)
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